Nuqoosh

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है लापता जमाने से – नोमान शौक़

है लापता जमाने से सारे के सारे ख्वाब किस के बदन से लिपटे हुए है हमारे ख्वाब मैं शाम की बलाएं लूँ या बोसा सुबह का बिखरे पडे है रात के दोनो किनारे ख्वाब...

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टूटते जाते हैं सब – अहमद नदीम क़ासमी

टूटते जाते हैं सब आईना ख़ाने मेरे वक़्त की ज़द में हैं यादों के खज़ाने मेरे ज़िंदा रहने की हो नी्यत तो शिकायत कैसी मेरे लब पर जो गिले हैं वो बहाने मेरे रख़श-ए-हालात...

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गुल तेरा रंग चुरा लाए – अहमद नदीम क़ासमी

गुल तेरा रंग चुरा लाए हैं गुलज़ारों में जल रहा हूँ भरी बरसात की बौछारों में मुझ से कतरा के निकल जा मगर ए जान-ए-जहां! दिल की लौ देख रहा हूँ तिरे रुख़सारों में...

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तिरे सुख़न ने कहाँ से ये दिलकशी पाई – ज़रक़ा मुफ़्ती

तिरे सुख़न ने कहाँ से ये दिलकशी पाई सुकूत में भी तिरे हम ने नग़मगी पाई कलाम हम से भी करते गुलाब लहजे में समाअतों में निहां आरज़ू यही पाई तिरे मिज़ाज के मौसम...

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तुम्हें ख़्याल ज़ात है – एतेबार साजिद

तुम्हें ख़्याल ज़ात है शऊर ज़ात ही नहीं ख़ता माफ़ तुम्हारे बस की बात ही नहीं ग़ज़ल फ़िज़ा भी ढूंढती है अपने ख़ास रंग की हमारा मसला फ़क़त क़लम दवात ही नहीं हमारी साअतों...

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तुम्हारे बाद इस दिल का खन्डर – एतेबार साजिद

तुम्हारे बाद इस दिल का खन्डर अच्छा नहीं लगता जहां रौनक नहीं होती वो घर अच्छा नहीं लगता नया इक हमसफ़र चाहूं तो आसानी से मिल जाये मगर मुझ को ये अंदाज़-ए-सफ़र अच्छा नहीं...