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नज़र उठा दिल-ए-नादाँ ये जुस्तजू क्या है – तिलोक चाँद महरूम

नज़र उठा दिल-ए-नादाँ ये जुस्तजू क्या  है उसी का जलवा तो है और रूबरू किया है किसी की एक नज़र ने बता दिया मुझको सुरूर-ए-बादा बे साग़र-ओ-सुबू क्या है क़फ़स अज़ाब सही, बुलबुल-ए-असीर ,...

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मय-कशी का लुतफ़ तन्हाई में क्या, कुछ भी नहीं – हसीन बांदी शबाब बनारसी

मय-कशी का लुतफ़ तन्हाई में क्या, कुछ भी नहीं यार पहलू में ना हो जब तक, मज़ा कुछ भी नहीं तुम रहो पहलू में मेरे, मैं तुम्हें देखा करूँ हसरत-ए-दिल ए सनम, इस के...

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बच्चों के लिए अल्लामा इक़बाल की नज़्म : एक मकड़ा और मक्खी

बच्चों के लिए अल्लामा इक़बाल की नज़्म एक मकड़ा और मक्खी इक दिन किसी मक्खी से यह कहने लगा मकड़ा इस राह से होता है गुज़र रोज़ तुम्हारा लेकिन मेरी कुटिया की ना जागी...

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ये वाइज़ कैसी बहकी बहकी बातें हमसे करते हैं​ – लाला माधव राम जोहर फर्रुखाबादी

ये वाइज़ कैसी बहकी बहकी बातें हमसे करते हैं​ कहीं चढ़ कर शराब-ए-इश्क़ के नशे उतरते हैं​ ख़ुदा समझे ये क्या सय्याद-ओ-गुलचीं ज़ुलम करते हैं​ गुलों को तोड़ते हैं बुलबलों के पर कुतरते हैं​...

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बुत-कदे में न तुझे काबे के अंदर पाया – लाला माधव राम जोहर

बुत-कदे में न तुझे काबे के अंदर पाया दोनों आलम से जुदा हम ने तिरा घर पाया यूँ तो दुनिया में क़यामत के परी रो  देखे सब से बढ़ कर तुझे ए फितना-ए-महशर पाया...

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ना आँखें ही बरसीं ना तुम ही मिले – नासिर काज़मी

ना आँखें ही बरसीं ना तुम ही मिले बहारों में अब की नए गुल खुले ना जाने कहाँ ले गए क़ाफ़िले मुसाफ़िर बड़ी दूर जा कर मिले वही वक़्त की क़ैद है दरमियाँ वही...

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गिरफ़्ता-दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने – नासिर काज़मी

गिरफ़्ता-दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा ना पहचाने मिटी मिटी सी उम्मीदें थके थके से ख़्याल बुझे बुझे से निगाहों में ग़म के अफ़साने हज़ार शुक्र कि हमने ज़बां...

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शौक़ का रंग बुझ गया याद के ज़ख़म भर गए – जॉन एलिया

शौक़ का रंग बुझ गया याद के ज़ख़म भर गए क्या मेरी फ़सल हो चुकी क्या मेरे दिन गुज़र गए रह गुज़र-ए-ख़्याल में दोश बदोश थे जो लोग वक़्त की गर्द बाद में जाने...

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एक ही शख़्स था जहान में क्या – जॉन एलिया

उम्र गुज़रेगी इमतिहान में क्या दाग़ ही देंगे मुझको दान में क्या मेरी हर बात बे-असर ही रही नुक्स है कुछ मरे बयान में क्या मुझको तो कोई टोकता भी नहीं यही होता है...