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सितारो तुम तो सोजाओ – क़तील शिफ़ाई

परेशां रात सारी है, सितारो तुम तो सोजाओ सुकूत-ए-मर्ग तारी है, सितारो तुम तो सोजाओ हंसो और हंसते हंसते डूबते जाओ ख़लाओं में हमें पर रात भारी है, सितारो तुम तो सोजाओ हमें तो...

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दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं ज़ख़म कैसे भी हों , कुछ रोज़ में भर जाते हैं रास्ता रोके खड़ी है यही उलझन कब से कोई पूछे तो कहें क्या कि...

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एक वादा है किसी का – साग़र सिद्दीकी

एक वादा है किसी का जो वफ़ा होता नहीं वर्ना इन तारों भरी रातों में क्या होता नहीं जी में आता है उलट दें उनके चेहरे का निक़ाब हौसला करते हैं लेकिन हौसला होता...

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दिल में इक लहर सी उठी है अभी – नासिर काज़मी

दिल में इक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में कोई दीवार सी गिरी है अभी भरी दुनिया में जी नहीं लगता जाने किस चीज़...

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काग़ज़ का एक चांद लगा कर – सम्पूर्ण सिंह कालरा ‘गुलज़ार’

ओस पड़ी थी रात बहुत और हल्की थी गरमाइश, पर सीली सी ख़ामोश मैं , वो बोले तो फ़र्माइश पर फ़ासले हैं भी और नहीं, नापा तोला कुछ भी नहीं लोग बज़िद रहते हैं...

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ज़िंदगी ख़त्म हुई अब यारो – ओपेंद्र नाथ अश्क

ओपेंद्रा नाथ अश्क की एक ग़ज़ल 1910-1999 ज़िंदगी ख़त्म हुई अब यारो , दनाई सिखलाना क्या उम्र गँवा दी नादानी मे , अब उस पर पछताना क्या इतना अरसा जी आए हैं कैसे, ये...

French Urdu Poet Captain Alexender Aazad 0

मिर्ज़ा ग़ालिब का फ़्रांसिसी शागिर्द (कैप्टन इलैगज़ेंडर आज़ाद)

मिर्ज़ा ग़ालिब का फ़्रांसिसी शागिर्द (कैप्टन इलैगज़ेंडर आज़ाद) इलैगज़ेंडर आज़ाद 1829 को पैदा हुए । उर्दू अदब में ख़ासी दिलचस्पी रखते थे। फ़्रांस के बाशिंदे होने के बावजूद उर्दू में ऐसे बाकमाल थे कि...

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कहूं किस से क़िस्सा-ए-दर्द-ओ-ग़म -अकबर इलाहाबादी

अकबर इलाहाबादी की एक ग़ज़ल कहूं किस से क़िस्सा-ए-दर्द-ओ-ग़म, कोई हमनशीं है ना यार है जो अनीस है तिरी याद है, जो शफ़ीक़ है दिल-ए-ज़ार है तो हज़ार करता लगावटें में कभी ना आता...

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क़तील शिफाई : बातें न बनाव इंशा जी

क़तील शिफाई : बातें न बनाव इंशा जी [su_row] [su_column size=”1/2″] यह किस ने कहा तुम कूच करो, बातें ना बनाओ इंशा जी ये शहर तुम्हारा अपना है, उसे छोड़ ना जाओ इंशा जी जितने...