0

वो जालिम मेरी हर ख्वाहिश – मुनव्वर राना

वो जालिम मेरी हर ख्वाहिश ये कह कर टाल जाता है दिसंबर जनवरी में कोई नैनीताल जाता है! अभी तो बेवफाई का कोई मौसम नहीं आया अभी से उड के क्यों ये रेशमी रूमाल...

0

मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे ! – गुलज़ार

मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे ! अक्सर तुझको देखा है कि ताना बूनते जब कोई ताना टूट गया या ख़त्म हुआ फिर से बांध के और सिरा कोई जोड़ के उस में...

0

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें – मजरूह सुल्तानपुरी

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख भी बदल गए तेरा हाथ, हाथ में आगया कि चराग़-ए-राह में जल गए वो लजाए मेरे सवाल पर कि उठा सके ना झुका सके उड़ी...

0

जला के मशअल-ए-जाँ हम-जुनूँ सिफ़ात चले – मजरूह सुल्तानपुरी

जला के मशअल-ए-जाँ हम-जुनूँ सिफ़ात चले जो घर को आग लगाए हमारे साथ  चले दयार-ए-शाम नहीं मंज़िल-ए-सहर भी नहीं अजब नगर है यहां दिन चले ना रात चले हमारे लब ना सही वो दहान-ए-ज़ख़म...

0

हमको जुनूँ क्या सिखलाते हो – मजरूह सुलतानपुरी

ग़ज़ल मजरूह सुलतानपुरी हमको जुनूँ क्या सिखलाते हो, हम थे परेशां तुमसे ज़्यादा चाक कीए हैं हमने अज़ीज़ो, चार गरीबां तुमसे ज़्यादा चाक-ए-जिगर मुहताज-ए-रफ़ू है, आज तो दामन सर्फ़-ए-लहू है एक मौसम था हमको...

0

तन-ए-तनहा मुकाबिल हो रहा हूँ मैं – कैफ भोपाली

तन-ए-तनहा मुकाबिल हो रहा हूँ मैं हजारों से हसीनों से रकीबों से गमों से गम-गुसारों से उन्हें मैं छीन कर लाया हूँ कितने दावे-दारों से शफक से चाँदनी रातों से फूलों से सितारों से...

0

जब भी देखा मेरे किरदार पे धब्बा कोई – मुनव्वर रना

जब भी देखा मेरे किरदार पे धब्बा कोई देर तक बैठ के तन्हाई में रोया कोई लोग माज़ी का भी अन्दाज़ा लगा लेते हैं मुझको तो याद नहीं कल का भी क़िस्सा कोई बेसबब...

0

अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दो – वसी शाह

अपने एहसास से छू कर मुझे संदल कर दो मैं कई सदीयों से अधूरा हूँ मुकम्मल कर दो ना तुम्हें होश रहे और ना मुझे होश रहे इस क़दर टूट के चाहो, मुझे पागल...

0

चाँद-रात है – वसी शाह

आँखों में चुभ गईं तरी यादों की किर्चियाँ काँधों पे ग़म की शाल है और चाँद-रात है दिल तोड़ के ख़मूश नज़ारों का क्या मिला? शबनम का ये सवाल है और चाँद-रात है कैम्पस...