Nuqoosh

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तुम्हारे ख़त में नया – दाग़ देहलवी

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का था वो क़त्ल कर के हर किसी से पूछते हैं ये काम किस ने किया है ये...

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ये मोजिज़ा भी मुहब्बत – क़तील शिफ़ाई

ये मोजिज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाए मुझे कि संग तुझ पे गिरे और ज़ख्म आए मुझे में अपने पांव तले रोंदता हूँ साय को बदन मिरा सही, दोपहर ना भाए मुझे में घर से...

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तुम्हारी अंजुमन से उठ के – क़तील शिफ़ाई

तुम्हारी अंजुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते जो वाबस्ता हुए तुम से वो अफ़साने कहाँ जाते निकल कर देर-ओ-काअबा से अगर मिलता ना मैखाना तो ठुकराए हुए इंसां ख़ुदा जाने कहाँ जाते तुम्हारी...

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नामा बर अपना हवाओं को – क़तील शिफ़ाई

क़तील शिफ़ाई की एक ग़ज़ल नामा बर अपना हवाओं को बनाने वाले अब ना आयेंगे पलट कर कभी जाने वाले क्या मिलेगा तुझे बिखरे हुए ख़ाबों के सिवा रेत पर चांद की तस्वीर बनाने...

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राबिता लाख सही – क़तील शिफ़ाई

राबिता लाख सही क़ाफ़िला सालार के साथ हम को चलना है मगर वक़्त की रफ़्तार के साथ ग़म लिखे रहते हैं हर आन ख़ुशी के पीछे दुश्मनी धूप की है साया-ए-दीवार के साथ किस...

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है लापता जमाने से – नोमान शौक़

है लापता जमाने से सारे के सारे ख्वाब किस के बदन से लिपटे हुए है हमारे ख्वाब मैं शाम की बलाएं लूँ या बोसा सुबह का बिखरे पडे है रात के दोनो किनारे ख्वाब...

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टूटते जाते हैं सब – अहमद नदीम क़ासमी

टूटते जाते हैं सब आईना ख़ाने मेरे वक़्त की ज़द में हैं यादों के खज़ाने मेरे ज़िंदा रहने की हो नी्यत तो शिकायत कैसी मेरे लब पर जो गिले हैं वो बहाने मेरे रख़श-ए-हालात...

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गुल तेरा रंग चुरा लाए – अहमद नदीम क़ासमी

गुल तेरा रंग चुरा लाए हैं गुलज़ारों में जल रहा हूँ भरी बरसात की बौछारों में मुझ से कतरा के निकल जा मगर ए जान-ए-जहां! दिल की लौ देख रहा हूँ तिरे रुख़सारों में...