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French Urdu Poet Captain Alexender Aazad 0

मिर्ज़ा ग़ालिब का फ़्रांसिसी शागिर्द (कैप्टन इलैगज़ेंडर आज़ाद)

मिर्ज़ा ग़ालिब का फ़्रांसिसी शागिर्द (कैप्टन इलैगज़ेंडर आज़ाद) इलैगज़ेंडर आज़ाद 1829 को पैदा हुए । उर्दू अदब में ख़ासी दिलचस्पी रखते थे। फ़्रांस के बाशिंदे होने के बावजूद उर्दू में ऐसे बाकमाल थे कि...

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कहूं किस से क़िस्सा-ए-दर्द-ओ-ग़म -अकबर इलाहाबादी

अकबर इलाहाबादी की एक ग़ज़ल कहूं किस से क़िस्सा-ए-दर्द-ओ-ग़म, कोई हमनशीं है ना यार है जो अनीस है तिरी याद है, जो शफ़ीक़ है दिल-ए-ज़ार है तो हज़ार करता लगावटें में कभी ना आता...

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इब्न इंशा का तारुफ़ (परिचय)

इब्न इंशा Jun 15, 1927 इबन इंशा का शुमार उर्दू के उन माया नाज़ क़लमकारों में होता है जिन्हों ने नज़म-ओ-नसर दोनों मैदानों में अपने फ़न के झंडे गाड़े। एक जानिब वो उर्दू के...

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इस का गिला नहीं कि दुआ बेअसर गई – तिलोक चंद महरूम

इस का गिला नहीं कि दुआ बेअसर गई इक आह की थी वो भी कहीं जा के मर गई ए हमनफ़स, ना पूछ जवानी का माजरा मौज-ए-नसीम थी ….. इधर आई उधर गई दाम-ए-ग़म-ए-हयात में...

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फैज़ की शायरी हमें खुशी भी देती है, हैरानी भी

फ़ैज़ जन्मशती के अवसर पर प्रसिद्ध शायर शहरयार से प्रेमकुमार द्वारा की गई बातचीत की एक बानगी – “वो लोग बहुत ख़ुशकिस्मत थे जो इश्क़ को काम समझते थे या जो काम से आशिक़ी...

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आप अपना गुबार थे हम तो – जान एलिया

आप अपना गुबार थे हम तो याद थे यादगार थे हम तो पर्दगी! हम से क्यों रखा पर्दा तेरे ही पर्दादार थे हम तो वक़्त की धूप में तुम्हारे लिए शजर-ए-सायादार थे हम तो...

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तेरे प्यार में रुसवा हो कर – उबैदुल्लाह अलीम

तेरे प्यार में रुसवा हो कर जाएं कहाँ दीवाने लोग जाने क्या क्या पूछ रहे हैं ये जाने पहचाने लोग हर लम्हा एहसास की सहबा रूह में ढलती जाती है ज़ीस्त का नशा कुछ...